भाई सत्यनारायण
वार्धक्य की दहलीज पार करके गए भाई
सत्यनारायण – सरलता और सद्भावना से ओतप्रोत, एक सफल सार्थक, गरिमामय दीर्घायु जीवन
और कुछ मधुर स्मृतियाँ और प्रांतीय साहित्यिक समुदाय में एक अपूरणीय रिक्ति अपने पीछे
छोड़कर गए वे। संस्कृत का श्लोक है -
एक सार्थ प्रयातानां
सर्वेषां तत्र गामिनाम
यदयेकस त्वरिताम
यताह यात्रा का परिदेवनाम ।।
“सभी जब एक ही गंतव्य की ओर जा रहे हों, तब एक यदि पहले वहाँ
पहुँच जाए तो उसके लिए शोक क्या करना।” इसलिए शोक उनके चले जाने का नहीं, उनकी स्थायी
अनुपस्थिति का है।
मेरे लिए तो वे मेरे अग्रज थे। हम दोनों एक ही स्कूल - पटना
कॉलेजियट में साथ पढे थे, वे संभवतः मुझसे एक क्लास आगे थे, ओर हमारा पिछले ७५ वर्षों
का साथ था। मेरे पिता जब छपरा कॉलेज से पटना बिहार राष्ट्रभाषा परिषद में आए, तब हम
१९५० से १९५९ तक वहीं कदमकुआं में हिन्दी साहित्य सम्मेलन भवन में ही रहे। कॉलेज की
एम.ए. तक की पढ़ाई वहीं रहते हुए की। सत्यनारायण
भाई सम्मेलन के बिल्कुल पास ही नाला रोड में दायें पहली गली में रहते थे, जिस गली में
शत्रुघ्न सिनहा का भी मकान था।
सत्यनारायण भाई से लगभग नित्यप्रति का साथ रहा। सम्मेलन में
भी उनके कविता-पाठ बराबर हुआ करते थे। जयप्रकाश जी, बेनीपुरीजी, दिनकरजी, नलिनजी, नागार्जुनजी
– वे सबके प्रिय बने रहे। हृदय-स्पर्शी गीतों
के कवि थे वे। बिहार राज्य के लिए राज्य-गीत लिखने का गौरव उन्हीं को मिला। बिहार सरकार
ने इसके लिए उनको सम्मानित भी किया। उलझी हुई भारी-भरकम कविता वे नहीं लिखते थे। सरल,
सहज भावनाओं के सुमधुर गीत होते थे उनके। सम्पूर्ण क्रांति के समय उन्होंने कुछ सामयिक
स्वर की कविताएं भी लिखीं। वे सहज गीतमय कविताएं ही लिखते थे। सहजता में ही उनका सारा
सौन्दर्य होता था। वैसी ही उनकी एक कविता ‘चेतावनी’ की कुछ पंक्तियों
से उनको स्मरण करते हुए उनकी पुण्य-स्मृति को मेरी श्रद्धांजलि।
ख़बरदार
‘राजा नंगा है‘...
मत कहना
राजा नंगा है तो है
इससे तुमको क्या
सच को सच कहने पर
होगी घोर समस्या
सभी सयाने चुप हैं
तुम भी चुप रहना
राजा दिन को रात कहे तो
रात कहो तुम
राजा को जो भाये
वैसी बात करो तुम
जैसे राखे राजा
वैसे ही रहना
राजा जो बोले
समझो कानून वही है
राजा उल्टी चाल चले
तो वही सही है
इस उल्टी गंगा में
तुम उल्टा बहना
राजा की तुम अगर
खिलाफ़त कभी करोगे
चौराहे पर सरेआम
बेमौत मरोगे
अब तक सहते आये हो
अब भी सहना ।

No comments:
Post a Comment